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साहित्य अकादमी ने 24 भाषाओं में अपने 2023 पुरस्कारों की घोषणा की

साहित्य अकादमी ने 24 भाषाओं में अपने 2023 पुरस्कारों की घोषणा की

 साहित्य अकादमी ने इस वर्ष पुस्तकों के लिए कुछ विशेष पुरस्कार दिये। उन्होंने ऐसी पुस्तकें चुनीं जो विभिन्न भाषाओं में लिखी गई थीं। संजीव की किताब 'मुझे पहचानो' ने हिंदी की सर्वश्रेष्ठ किताब होने का पुरस्कार जीता। नीलम सरन गौड़ की पुस्तक 'रिक्विम इन रागा जानकी' ने अंग्रेजी में सर्वश्रेष्ठ पुस्तक होने का पुरस्कार जीता। स्वर्णजीत सावी की कविताओं की पुस्तक 'मन दी चिप' ने पंजाबी में सर्वश्रेष्ठ पुस्तक होने का पुरस्कार जीता। और सादिका नवाब सहर की किताब 'राजदेव की अमराई' ने उर्दू की सर्वश्रेष्ठ किताब होने का पुरस्कार जीता। ये पुरस्कार उन पुस्तकों को दिए गए जो पिछले पांच वर्षों में पहली बार प्रकाशित हुईं। तीन लोगों के एक समूह ने सभी किताबें पढ़ीं और निर्णय लिया कि कौन सी सर्वश्रेष्ठ थीं।

भारत में पुस्तकों को एक विशेष पुरस्कार दिया जा रहा है। यह पुरस्कार भारत में बोली जाने वाली सभी 24 विभिन्न भाषाओं में दिया जाएगा। इसमें कविताओं की नौ किताबें, कहानियों की छह किताबें, निबंध की पांच किताबें और अन्य किताबों के बारे में बात करने वाली एक किताब शामिल होगी। पुरस्कार समारोह 12 मार्च, 2024 को होगा, जो पुरस्कार देने वाले संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि उन्हें लगभग 70 साल हो गए होंगे।

कविता के लिए पुरस्कृत लेखक

विजय वर्मा (डोगरी), विनोद जोशी (गुजराती), मंशूर बनिहाली (कश्मीरी), सोरोख्खैबम गंभिनी (मणिपुरी), आशुतोष परिडा (ओड़िया), स्वर्णजीत सवी (पंजाबी), गजेसिंह राजपुरोहित (राजस्थानी), अरुण रंजन मिश्र (संस्कृत), विनोद आसुदानी (सिंधी)।

उपन्यास के लिए पुरस्कृत लेखक

स्वपनमय चक्रबर्ती (बांग्ला), कृष्णात खोत (मराठी), राजशेखरन (देवीभारती)।

 क्रम में पुरस्कृत कहानी-संइसीग्रह के लेखक

प्रणव ज्योति डेका (असमिया), नंदेश्वर दैमारि (बोडो), प्रकाश एस पर्येंकार (कोंकणी), तारासीन बासकी (तुरिया चंद बासकी) (संताली), टी पतंजलि शास्त्री (तेलुगु)।

निबंध के लिए पुरस्कृत लेखक

लक्ष्मीशा तोल्पडि (कन्नड़), बासुकीनाथ झा (मैथिली), युद्धवीर राणा (नेपाली)। आलोचना के लिए मलयालम लेखक ईवी रामकृष्णन पुरुस्कृत होंगे।

किताब लिखने से पहले 10 साल जानकी पर शोध किया...

नीलम सरन गौड़ वह व्यक्ति हैं जो प्रयागराज में रहती हैं और शहर के बारे में कहानियाँ लिखती हैं। जब वे केवल 6 वर्ष के थे तब उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था। उनकी पुस्तक में मुख्य पात्र का नाम जानकी है, जो बहुत समय पहले एक प्रसिद्ध गायिका थी जब लोग ग्रामोफोन पर संगीत सुनते थे। जानकी कोलकाता की गौहर जान नाम की एक और गायिका से प्रतिस्पर्धा करती थीं। भले ही जानकी बहुत प्रतिभाशाली थीं, लेकिन उनका जीवन दुखों से भरा था। लेखक ने किताब लिखने से पहले जानकी पर शोध करने में 10 साल बिताए। यह किताब जानकी के जीवन और शास्त्रीय संगीत के प्रति उनके प्रेम की कहानी बताती है। इसमें जानकी के कुछ खूबसूरत गाने भी शामिल हैं। यह किताब इसलिए खास है क्योंकि यह लेखक द्वारा लिखी गई 13वीं किताब है। उनकी पहली किताब 30 साल पहले प्रकाशित हुई थी, और यह नई किताब पेंगुइन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई थी।

60 उपन्यास और 400 से ज्यादा कहानियां लिख चुके हैं संजीव

'मुझे पहचानो' किताब लिखने वाले संजीव ने बताया कि वह सुल्तानपुर में रहते हैं। उन्होंने अब तक 60 किताबें और 400 से ज्यादा कहानियां लिखी हैं। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में काफी अध्ययन किया है. इस किताब में उन्होंने बताया है कि समाज में महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने सती नामक कुप्रथा के बारे में भी विस्तार से बताया, जहां लोग किसी महिला को आग में जिंदा जला देते थे। ऐसा करते समय वे तेज़ संगीत बजाते थे और फिर आग और महिला को नदी में फेंक देते थे। यह पुस्तक राज्यों के बीच संघर्षों के बारे में भी कहानियाँ बताती है। इसमें अन्य कहानियाँ भी शामिल हैं कि कैसे लोग मूल्यवान चीज़ों के लिए एक-दूसरे को चोट पहुँचाने को तैयार हैं। अगर आप किताब पढ़ेंगे तो आपको ये कहानियां दिलचस्प लगेंगी। पुस्तक का प्रकाशन सेतु प्रकाशन द्वारा किया गया था।